Saturday, 30 November 2019
Vastu Shastra || अगर करते है ऐसे अपशगुन तो आज ही बंद कर दे
अगर करते हैं ये अपशगुन, तो अभी बंद कर दें, वरना बर्बादी से नहीं बच पाओगे
दोस्तो, जीवन में हम जाने अंजाने में बहुत से ऐसे काम कर देते है जो नहीं करने चाहिए । आज हम आपको बताएंगे, वो ऐसे काम कौन कौन से हैं । जिन्हे अपशगुन भी कहते है ।
मुख्य द्वार के पास कभी भी कूड़ादान ना रखें, इससे पड़ोसी शत्रु हो जायेंगे ।
सूर्यास्त के समय किसी को भी दूध, दही, या प्याज माँगने पर ना दें, इससे घर की बरकत समाप्त हो जाती है ।
छत पर कभी भी अनाज या बिस्तर ना धोएं, हाँ सुखा सकते है, इससे ससुराल से सम्बन्ध खराब होने लगते हैं ।
फल खूब खाओ स्वास्थ्य के लिए अच्छे है । लेकिन उसके छिलके कूड़ेदान में ना डालें, वल्कि, बाहर फेंके इससे मित्रों से लाभ होगा ।
माह में एक बार किसी भी दिन घर में मिश्री युक्त खीर जरुर बनाकर परिवार सहित एक साथ खाएं । अर्थात, जब पूरा परिवार घर में इकट्ठा हो उसी समय खीर खाएं । तो माँ लक्ष्मी की जल्दी कृपा होती है ।
माह में एक बार अपने कार्यालय में भी कुछ मिष्ठान जरुर ले जाये, उसे अपने साथियों के साथ या अपने अधीन नौकरों के साथ मिलकर खाये तो धन लाभ होगा ।
रात्री में सोने से पहले रसोई में बाल्टी भरकर रखें, इससे क़र्ज़ से शीघ्र मुक्ति मिलती है । और यदि बाथरूम में बाल्टी भरकर रखेंगे, तो जीवन में उन्नति के मार्ग में बाधा नही आयेगी ।
वृहस्पतिवार के दिन घर में कोई भी पीली वस्तु अवश्य खाएं, हरी वस्तु ना खाएं तथा बुधवार के दिन हरी वस्तु खाएं, लेकिन पीली वस्तु बिलकुल ना खाएं, इससे सुख समृद्धि बढ़ेगी ।
रात्रि को झूठे बर्तन कदापि ना रखें, इसे पानी से निकाल कर रख सकते है, इसको करने से होने वाली हानि से बचा जा सकता है ।
स्नान के बाद गीले या एक दिन पहले के प्रयोग किये गये तौलिये का प्रयोग ना करें, इससे संतान हठी व परिवार से अलग होने लगती है, अपनी बात मनवाने लगती है अतः रोज़ साफ़ सुथरा और सूखा तौलिया ही प्रयोग करें ।
कभी भी यात्रा में पूरा परिवार एक साथ घर से ना निकलें आगे पीछे जाएँ, इससे यश की वृद्धि होगी ।
ऐसे ही अनेक अपशगुन है, जिनका हम ध्यान रखें, तो जीवन में किसी भी समस्या का सामना नही करना पड़ेगा, तथा सुख समृद्धि बढ़ेगी ।
Vastu Shastra || माथे पर तिलक क्यों लगाते है || कौन सी अंगुली का क्या है...
माथे पर तिलक क्यों लगाया जाता है.
हिन्दू आध्यात्म की असली पहचान तिलक से होती है। मान्यता है कि तिलक लगाने से समाज में मस्तिष्क हमेशा गर्व से ऊंचा होता है। हिंदू परिवारों में किसी भी शुभ कार्य में "तिलक या टीका" लगाने का विधान हैं। यह तिलक कई वस्तुओ और पदार्थों से लगाया जाता हैं। इनमें हल्दी, सिन्दूर, केशर, भस्म और चंदन आदि प्रमुख हैं, परन्तु क्या आप जानते हैं कि इस तिलक लगाने के प्रति भावना क्या छिपी हैं ।
पुराणों में वर्णन मिलता है कि संगम तट पर गंगा स्नान के बाद तिलक लगाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है की स्नान करने के बाद पंडों द्वारा विशेष तिलक अपने भक्तों को लगाया जाता है। माथे पर तिलक लगाने के पीछे आध्यात्मिक महत्व है।
दरअसल, हमारे शरीर में सात सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र होते हैं, जो अपार शक्ति के भंडार हैं। इन्हें चक्र कहा जाता है। माथे के बीच में जहां तिलक लगाते हैं, वहां आज्ञाचक्र होता है। यह चक्र हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, जहां शरीर की प्रमुख तीन नाडि़यां, इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना आकर मिलती हैं । इसलिए इसे त्रिवेणी या संगम भी कहा जाता है।
यह गुरु स्थान कहलाता है। यहीं से पूरे शरीर का संचालन होता है। यही हमारी चेतना का मुख्य स्थान भी है। इसी को मन का घर भी कहा जाता है। इसी कारण यह स्थान शरीर में सबसे ज्यादा पूजनीय है। योग में ध्यान के समय इसी स्थान पर मन को एकाग्र किया जाता है।
तिलक लगाने से एक तो स्वभाव में सुधार आता हैं, व देखने वाले पर सात्विक प्रभाव पड़ता हैं। तिलक जिस भी पदार्थ का लगाया जाता हैं । उस पदार्थ की ज़रूरत अगर शरीर को होती हैं, तो वह भी पूर्ण हो जाती हैं। तिलक किसी खास प्रयोजन के लिए भी लगाये जाते हैं, जैसे यदि मोक्षप्राप्ती करनी हो तो तिलक अंगूठे से, शत्रु नाश करना हो तो तर्जनी से, धनप्राप्ति हेतु मध्यमा से तथा शान्ति प्राप्ति हेतु, अनामिका से लगाया जाता है ।
आमतौर से तिलक, अनामिका द्वारा लगाया जाता हैं । और उसमे भी केवल चंदन ही लगाया जाता हैं । तिलक संग चावल लगाने से लक्ष्मी को आकर्षित करने का तथा ठंडक व सात्विकता प्रदान करने का निमित छुपा हुआ होता हैं। अतः प्रत्येक व्यक्ति को तिलक ज़रूर लगाना चाहिए।
मान्यताओं के अनुसार, सूने मस्तक को शुभ नहीं माना जाता। माथे पर चंदन, रोली, कुमकुम, सिंदूर या भस्म का तिलक लगाया जाता है। तिलक हिंदू संस्कृति में एक पहचान चिन्ह का काम करता है। तिलक लगाने की केवल धार्मिक मान्यता नहीं है । बल्कि इसके कई वैज्ञानिक कारण भी हैं।
हिंदू धर्म में जितने संतों के मत हैं, जितने पंथ है, संप्रदाय हैं । उन सबके अपने अलग-अलग तिलक होते हैं। तंत्र शास्त्र में पंच गंध या अस्ट गंध से बने तिलक लगाने का बड़ा ही महत्व है तंत्र शास्त्र में शरीर के तेरह भागों पर तिलक करने की बात कही गई है, लेकिन समस्त शरीर का संचालन मस्तिष्क करता है। इसलिए इस पर तिलक करने की परंपरा अधिक प्रचलित है। तिलक लगाने में सहायक हाथ की अलग-अलग अंगुलियों का भी अपना महत्व है ।
दोस्तो तिलक लगाने के ये हैं, 7 जबरदस्त फायदे ।
किसी के माथे पर तिलक लगा देखकर मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है । कि आखिर टीका लगाने से फायदा क्या है । क्या यह महज दूसरों के सामने दिखावे के मकसद से किया जाता है । या फिर तिलक धारण का कुछ वैज्ञानिक आधार भी है । दरअसल, टीका लगाने के पीछे आध्यात्मिक भावना के साथ-साथ दूसरे तरह के लाभ की कामना भी होती है ।
किसी के माथे पर तिलक लगा देखकर मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर टीका लगाने से फायदा क्या है । क्या यह महज दूसरों के सामने दिखावे के मकसद से किया जाता है । या फिर तिलक धारण का कुछ वैज्ञानिक आधार भी है । दरअसल, टीका लगाने के पीछे आध्यात्मिक भावना के साथ-साथ, दूसरे तरह के लाभ की कामना भी होती है ।
आम तौर पर चंदन, कुमकुम, मिट्टी, हल्दी, भस्म आदि का तिलक लगाने का विधान है, अगर कोई तिलक लगाने का लाभ तो लेना चाहता है, पर दूसरों को यह दिखाना नहीं चाहता तो शास्त्रों में इसका भी उपाय बताया गया है, कहा गया है कि ऐसी स्थिति में ललाट पर जल से तिलक लगा लेना चाहिए ।
इससे लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर कुछ लाभ बड़ी आसानी से मिल जाते हैं ।
सुबह 3 से 5 अगर आपकी आँख खुलती है तो शक्तियां देती है ये संकेत || Vastu ...
दोस्तो, आज हम बात करने जा रहे है । कि अगर आपकी नींद प्रातः 3 से 5 के बीच में खुलती है । तो इसका क्या कारण है। और देवीय शक्तियां क्या संकेत देना चाहती है
आपको, मित्रो में आपको बता दू । पूरी पृथ्वी भूमंडल में से मात्र तेरह प्रतिशत लोग ऐसे होते है । जिनकी आंख प्रातः तीन से पांच के बीच खुल जाती है । यदि दोस्तो आपके साथ भी ऐसा होता है तो शास्त्र के अनुसार, इसे देविक शक्तियों का आशीर्वाद माना गया है । जी हां, यदि प्रातः काल तीन से पांच आपकी आंख खुलती है । तो देविक शक्तियों का ये संकेत होता है । कि आप उठ जाओ स्वयं को जानो की में कौन हूं । इस सृष्टि पर में क्यों आया हूं । पैसा कमाने के लिए, अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए, भौतिक सुखों का आनंद लेने के लिए, या फिर लोगो की सहायता करने के लिए, लोगो का परमार्थ करने के लिए, तो दोस्तो यहां मै आपको बता दू ।
यदि आप ब्रह्म मूरत में उठते है तो आपको नेचर ने फोर्थ कैटेगरी में चुना है । जी है, पैसा कमाना अपनी जिम्मेदारियों को पूर्ण करना और भौतिक सुखों का आनंद लेना यह कार्य तो अच्छे बुरे सभी तरह के व्यक्ति करते है । किन्तु जीवन में यश, मन्न, प्रतिष्ठा प्राप्त करते हुए लोगो की सहायता करने के लिए देविक शक्तियां बहुत कम लोगो को चुनती है । और उनमें से आप भी एक होते है । जी हां, इसे ऐसे समझने का प्रयास करे। की इस सृष्टि पर आपको सोने के लिए नहीं भेजा गया है । सम्पूर्ण प्रथ्वी भूमंडल पर स्थित तेरह प्रतिशत लोगों में से आप भी एक है । जिनसे देविक शक्तियां कुछ उमीद रखती है । आपके माध्यम से लोगो का हित करवाना चाहती है ।
तो दोस्तो अब बात यह आती है कि करोड़ों लोगो में से नेचर ने आपको ही क्यों चुना । और यदि चुन भी लिया तो क्या हमे उसका फायदा उठाना चाहिए । और इसका फायदा उठाते भी है । तो हमे इसका क्या लाभ होगा तो दोस्तो यह बात तो आप लोग जानते ही होंगे । कि सुबह तीन से पांच की बेला को चोबीस घंटे में सर्वश्रे्ठ पद देते हुए अमृत बेला का नाम दिया गया है । जिसे ब्रह्म मूरत भी कहा जाता है । यह वह समय होता है जब देविक शक्तियों द्वारा प्रथ्वी पर अमृत बर्षा की जाती है । आपको यह बात भी ज्ञात होगी । की पूर्व समय में ऋषि मुनि ब्राह्मण प्रात:काल में ही पूर्ण संध्या किया करते थे । और फल स्वरूप उनकी वाणी के अंदर इतना अमृत और तेज हुआ करता था । कि जिसको जो आशीर्वाद दे दे । वो पूर्ण हो जाया करता था । ब्रह्म मूरत के समय अमृत बेला होती है । और इस बात को आप स्वयं भी देख सकते है । कि ब्रह्म मूरत में पेड-पोेधे, पशु-पक्षी, नदी-तालाब कितने प्रसन्न दिखते है । यदि समस्त प्रकार की मोह माया को छोड़ कर कभी आपने इस nature को feel किया होगा । तो आप भली भांति जानते होंगे कि ब्रह्म मूरत में सच में अमृत वर्षा होती है । और इस अमृत बेला में यदि आप उठते है । तो मेरा विश्वास मानिए । इस अमृत बेला के अंश आपको भी प्राप्त होते है । और परिणाम स्वरूप आपके अंदर इतनी पॉजिटिविटी आ जाती है । की आपकी पॉजिटिविटी का घेरा आपके घर । आपके परिवार, आपके ऑफिस जहां जहां आप जाते है उस स्थान को एक अलग सी पॉजिटिविटी दे देता है । और आपको और आपके परिवार को बड़ा खुशहाल बना देता है। अब । अभी तक आपने जितना जाना जिसके कारण प्रात: आपकी नींद क्यों खुलती है । इसका क्या कारण है और इसके क्या लाभ है । इतना तो आपकी समझ में आ ही गया होगा ।
किन्तु शास्त्रों में बताया गया है । कि यदि देविक शक्तियों का आप पर आशीर्वाद है । तो आप को ऐसा क्या करना चाहिए । की जिसके लिए आपको सृष्टि पर भेजा गया है । वह कार्य आप सकुशल कर पाए । तो दोस्तो मैं आपसे यही कहना चाहूंगा कि वीडियो को देखते देखते ही आप संकल्प ले की जब भी ब्रह्म मूरत में आपकी आंख खुल जाए तो आप कभी नहीं सोएंगे और यदि एकाएक आपके लिए यह संभव ना हो और निंद्रा का वेग बहुत अधिक हो तो भी आपको सीधे बैठ कर हाथ जोड़कर अपने इश्ठ देव को प्रणाम कर उनका धन्यवाद करना चाहिए की प्रभु आपका में तहेदिल से शुक्रगुजार हूं । की आपने मुझे इतना सुन्दर जीवन दिया और उस जीवन में एक और नया सवेरा देने के लिए आपका तेह दिल से शुक्रगुजार हूं । किन्तु दोस्तो, मैं आपको एक और चीज बता दू की ये अबस्था आपको तभी करनी चाहिए । जब निद्रा का वेग बहुत अधिक हो । अन्यथा ब्रह्म मूरत में उठने के बाद पुनः नहीं सोना चाहिए । अन्यथा ब्रह्म मूरत में उठने के बाद सोच आदि से निरबत होकर अपने बेड आदि पर या ज़मीन पर जहां भी आप सोते है । ध्यान मुद्रा में आंख बंद करके अपनी बॉडी को बिल्कुल रिलैक्स होने दे समाज, परिवार, जिम्मेदारियां, धन दौलत इन सबसे परे होकर यह समय सिर्फ अपने आप को दे । लंबी लंबी सांसें लेकर बाहर निकलते हुए ऐसा feel करे । कि मेरे शरीर के अंदर उपस्थित समस्त प्रकार की nigativity बाहर जा रही है । और जब सांस अंदर की तरफ ले तो ऐसा feel करे कि ब्रह्म मूरत में देवीक शक्तियों द्वारा बांटा जाने वाला अमृत, प्रसाद मेरे शरीर में अंदर प्रवेश कर रहा है । शरीर के सारे बीकार बाहर निकलते हुए मेरे शरीर में सिर्फ और सिर्फ ऊर्जा का वास हो रहा है । मुझे नेचर ने इस धरती पर लोगो की सहायता, लोगो का परमार्थ करने के लिए ही भेजा है । मित्रो में दावे के साथ कह रहा हूं । कि कुछ ही दिनों में आप स्वयं ही feel करने लगेंगे । की आपका पॉजिटिव एरा हर जगह काम कर रहा है । आप जो भी कार्य कर रहे है । वह बड़ी आसानी से पूर्ण होते जा रहे हैं । कई बार आपको ऐसा भी देखने को मिलेगा । की कोई कार्य आप सिर्फ सोच रहे है । उसको आपने किसी के साथ शेयर नहीं किया है । और आपके सोचते हुए ही वह कार्य हो गया । आपके जीवन में जिन भी व्यक्तियों के साथ आपका सम्पर्क है । वह आपको lucky charm मानने लगे है । आप जहां जा रहे है वहां एक पॉजिटिव औरा बनता जा रहा है । लोग अपने जीवन से जुड़ी समस्या को आप से पूछ कर अपने जीवन को खुशहाल बना रहे है । और आप जिस भी व्यक्ति को जिस भी कार्य का आशीर्वाद दे रहे है वह पूरा हो रहा है । और अंत्था आपके मन में यह सवाल आता है कि में लोगो की सहायता तो कर दूंगा । किन्तु मेरी जिम्मेदारियों का क्या होगा ।
तो मित्रो यहां में आपको बता दू लोगो का परमार्थ करने के साथ साथ आपको यह अनुभूति भी होगी की में एक सामान्य व्यक्ति की तरह धन कमाना, अपनी जिम्मेदारियां निभाना, व अपने परिवार के सदस्यों को भोतिक सुख तो प्रदान कर ही रहा हूं । साथ ही वह कार्य भी कर रहा हूं । जिसके लिए नेचर ने मुझे इस धरती पर भेजा है । और जब आप ऐसा कार्य करेंगे तो पूर्णतया आपको स्पष्टीकरण में यह अनुभूति भी होगी । की देवीक शक्तियां आपके साथ पूर्णतया कार्य कर रही है । मित्रो आशा करता हूं जो बात मै आपको समझाना चाहता था वो बात आप लोग भली भांति समझ गए होंगे । और प्रात: काल ब्रह्म मूरत में उठ कर बताई गई स्थिति का पालन करेंगे ।
जब भी कोई परिजन- पितृ सपने में आते है तो इंसान की जिंदगी मैं देते है ये ...
व्यक्ति जब दिन के कामों से थक हार कर रात को सोता है । तो उस समय हमारी इंद्री से जुड़ी बहुत सी यादें या फिर घटनाये ये सभी हमारे सपनों में घूमती है । हैरान करने वाली बात तो ये है । कि यदि रात के समय कोई व्यक्ति हमारे पास रखी कोई वस्तु उठा कर ले जाता है । तो हमे मालूम तक नहीं पडता, परंतु सपने में हमे एक दूसरी दुनिया का आभास होने लगता है । जो हमे याद रह जाती है । कुछ सपनों को देखकर तो हम खुश होते हैं । और कुछ सपनों को देखकर हम बहुत डर जाते हैं । और हमारी नींद खुल जाती है । क्या आपने कभी यह ध्यान दिया है । कि ये सपना हमे क्यों आया है और इस सपने के पीछे क्या सच्चाई छुपी है ।
दरअसल दोस्तो, शास्त्रों के मुताबिक आपके हर एक सपने के पीछे एक राज छुपा है । सपनों के ऊपर तो एक पूरा शास्त्र है । जिसे स्वपन शास्त्र के नाम से जाना जाता है परंतु आज हम बात करेंगे, जब कोई मृत व्यक्ति आपके सपनों में आए, तो उसका क्या मतलब है । कितनी ही बार हमने ऐसा सपना जरूर देखा होगा । जिसमें हमारे मृत रिश्तेदार, दूर का या फिर कोई बहुत ही खास रिश्तेदार सपने में आया हो । तो आखिर वो क्या कहना चाहता था हमसे तो चलिए दोस्तो शुरू करते है ।
दरअसल दोस्तो, ये वीडियो उन व्यक्तियों के लिए है । जिन्हें अधिकतर वृद्ध व्यक्तियों के सपने आते है या ऐसा कोई व्यक्ति जिसके किसी खास का देहान्त हो गया हो । और वह इस सदमे से बाहर नहीं आ पा रहा हो । अगर घर के किसी सदस्य की आयु की पूर्ति के बाद वह व्यक्ति स्वर्गवासी हो गया हो । तो ऐसे में घर के दूसरे सदस्यों भी बहुत जल्दी सदमे से बाहर नहीं निकल पाते है । यदि कोई व्यक्ति किसी बीमारी के बाद मृत्यु को प्राप्त हुआ हो । और सपने में वह आप को दिखाई देता हो । तो यह संकेत होता है । कि उसका जन्म किसी अच्छे स्थान पर हो गया है । और इस स्वपन के माध्यम से वह आपको संकेत देते है । कि अब उनके बारे में सोच कर आप स्वयं को तकलीफ ना दे । स्वपन शास्त्र में ऐसे सपनों को आश्वासन स्वपन का नाम दिया गया है । ऐसे सपने देखने के बाद आपको प्रसन होना चाहिए । कि हमारे पूर्वज का जन्म किसी अच्छे स्थान पर हो गया है। तथा अब वह खुश है। तथा वहीं किसी स्वस्थ सदस्य की मृत्य हो और सपने में वह आपको बीमार दिखाई दे तो । तो यह संकेत दर्शाता है । कि वह आपसे अपनी किसी इच्छा को व्यक्त करना चाहते है । और आपको उस इच्छा को समझने का प्रयास भी करना चाहिए। या फिर ऐसे सोचिए की स्वर्गवास होने से पहले उनकी कोई प्रबल इच्छा रह गई थी । जिसे वो पूरा करना चाहते थे। किन्तु वह कर नहीं पाए । तो यदि आपको इस इच्छा का पता हो । तो अवश्य ही इस इच्छा को पूरा करे, इससे स्वर्गवासी व्यक्ति की आत्मा को शान्ति प्राप्त होती है । साथ ही आपके परिवार में सुख समृद्धि कई गुना बढ जाती है । वहीं यदि आपको इच्छा पता होने के बावजूद आप वह इच्छा पूरी नहीं करते है । तो आप पर संकट आ सकता है ।
जब कोई जीवित व्यक्ति स्वपन में मृत दिखाई दे । तो हम घबरा जाते है । वहीं स्वपन शास्त्र के अनुसार, यह एक संकेत है । कि उस व्यक्ति की आयु में और ज्यादा वृदी हो गई है । जी हां दोस्तों ,ऐसा सपना लंबी आयु का सूचक होता है । और ऐसे सपने को बुरा सपना नहीं माना जाता है ।
कई बार आपने देखा होगा । हमारे स्वर्गवासी परिजन सपनों में दिखते तो है। पर कुछ बोलते नहीं तथा इन स्वपन को हम समझ नहीं पाते है । किन्तु में आपको बता दू । स्वपन शास्त्र के अनुसार, अगर हमारे परिजन सपने में दिखाई देते है । और कुछ बोलते नहीं । इसका मतलब होता है । कि हमारे जीवन में चल रही गति विधियों से वह हमें अवगत कराने का प्रयास कर रहे है । अर्थात या तो हम कोई गलत कार्य करने जा रहे है । या कार्य करने की सोच रहे है । स्वपन शास्त्र में ये भी दर्शाया गया है कि यदि कोई परिजन स्वपन में आए । और चुप रहे । परन्तु आशीर्वाद भी दे तो इसका मतलब होता है । कि जो कार्य हम कर रहे है या करने की सोच रहे है । उसमे हमें शत प्रतिशत सफलता मिलने वाली है । दूसरी ओर यदि वह हमें उदास दिखाई दे और यदि आपको यह आभास हो की वो हमारे द्वारा किए गए कार्यों से प्रसन्न नहीं है । तो ऐसे कार्यों को तुरंत छोड देना चाहिए । क्योंकि यह आपके लिए अशुभ परिणाम खड़े कर सकते है । क्योंकि सपनों के माध्यम से हमारे पूर्वज पहले से ही हमें आगाह तो कर देते है । परन्तु हम उनको ना समझने के कारण कई बार गलतियां कर बैठते है ।
कई बार हमको ऐसे स्वपन भी दिखाई देते है । जिसमें हमारे परिजन हमसे कुछ वस्तुओं की मांग करते दिखते है । परन्तु मुंह से कुछ नहीं बोलते जैसे हमको स्वपन में वह निर्वस्त्र दिखाई दे रहे है । या फिर पैरो में जूते चप्पल। कुछ नहीं पहने हुए दिखाई दे रहे है या तो भूखे दिखाई दे रहे है तो ऐसे में हमें जो वस्तुएं दिखाई नहीं दे रही है । वह वस्तुएं आप या तो उनके नाम से किसी ब्राह्मण को दे दे । या फिर किसी मंदिर में जा कर दान कर दे । और दान करते समय मन्न में ऐसा ध्यान करे । कि ये सभी वस्तुएं उन स्वर्गवासी व्यक्ति को प्राप्त हो रही है । ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते है । और आपकी मनोकामना भी पूर्ण होती है ।
यदि कोई स्वर्गवासी व्यक्ति हमें कहीं दूर या आसमान में दिखाई दे । तो स्वपन शास्त्र के अनुसार, ये संकेत दर्शाता है । कि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो चुकी है । और वह आकाशीय ब्रती से आपको आशीर्वाद प्रदान कर रहे है । और वही यदि स्वर्गवासी व्यक्ति आपको स्वपन में आस पास दिखाई दे या फिर घर मै दिखाई दे । तो इसका मतलब होता है । कि वो आपके परिवार से मोह नहीं छोड पाए है । और आपके परिवार को आज भी अपनी छत्रो छाया में रखना चाहते है । यदि आपको ये आभास हो गया है । तो आप रोज़ दो रोटी गाय को अवश्य खिलाए । और अमावस्या के दिन विशेषकर अपने पितृ के नाम से भोग लगाए । और सम्भव हो तो किसी ब्राह्मण को अमावस्या के दिन ही भोजन अवश्य कराए । ऐसा करने से आपके पितृ की आत्मा को शान्ति मिलेगी । और वह प्रसन्न हो जाएंगे । दोस्तो इसी के साथ ही में आपको एक और चीज से अवगत कराना चाहूंगा की हमारे हिन्दू धर्म में तेटिस कोटि के देवता होते है । जो कि सबके लिए बराबर होते है । लेकिन हमारे पितृ हमारे घर के ही देव होते है । जो मृत्यु के पश्चात भी हमारे घर की सुख समृद्धि और उन्नति का आशीर्वाद हमें प्रदान करते है । इसके अलावा दोस्तो यदि किसी व्यक्ति को स्वपन में शब यात्रा दिखाई देती है । तो यह संकेत है कि उस व्यक्ति के सारे कार्य पूर्ण संपन्न होने वाले है । दोस्तो यदि आपको भी ऐसे स्वपन आते है । तो यह जानकारी आपके लिए बहुत ही लाभदायक रहेगी ।
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